Jain Stavan Lyrics Na Dena Chahe Kuber Ka Dhan
( राग : जिहाले मस्किन मकुन बरंजिश - गुलामी )
ना देना चाहे कुबेर का धन ,
मगर सलीका शहुर देना ,
उठा के सर जी सकु जहां में ,
बस इतनी इज्जत जरुर देना . .
ना बैर कोई , ना कोई नफरत ,
नजर ना आए कोई बुराई ,
हर एक दिल में तु दे दिखाई ,
मेरी नजर को वो नुर देना . . . 1
जो चिज मांगी है मैने तुमसे ,
वो चिज मुझको जरुर देना ,
मिले जमाने की सारी खुशिया ,
मगर ना मुझको गुरुर देना . . 2
बड़ी ना मांगु मै चीज तुमसे ,
औकात जितनी है मांगता हूं ,
जो घाव दुःख ने दिया है दिल में ,
वो सुख का मरहम जरुर देना . . . 3
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