Saiyam ke path par chalne ka
संयम के पथ पर चलने का
( राग : मेरे सामने वाली खिड़की से )
संयम के पथ पर चलने का , अधिकार मैंने पाया है ,
आज्ञा पायी परिवार से , गुरुदेव से मुहरत पाया है . . .
कोई प्रबल पुण्य के सुफल से , मुझे मिलेगा संयम मे रमने ,
कंकु छाँटे , स्वस्तिक करते , इस वेष को सब है लगे रंगने ,
वरघोड़ा चला , वर्षीदान किया , पल विदाई का अब आया है ,
संयम के पथ पर . . . 1
दीक्षा की क्रियाएँ शुरु हुई , मंडप में सजा है समवसरण ,
चौमुखी प्रभु प्रतिमा शोभे , हुआ विजय तिलक , देव - वंदन ,
वैयावच्च में समकित धारी , देवों को भी बुलवाया है ,
संयम के पथ पर . . . 2
मुंडन कर दो , प्रवज्जित कर दो , गुरु धवल वेष अर्पित कर दो ,
नहीं रहे स्मृति संसार की अब , मेरा तन - मन परिवर्तित कर दो ,
मैंने गुरु कृपा थी सदा पायी , अब रजोहरण भी पाया है ,
संयम के पथ पर . . . 3
गुरुदेव ने लोच किया मेरा , मुझे करेमि भंते उच्चराया ,
मन से वचन से काया से , हर पाप का त्याग पच्चखाया ,
नया जीवन और नया नाम मिला , प्रदीप ने शीश झुकाया है , संयम के पथ पर . . . 4
प्रदीपजी ढालावत
मुंबई
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