Saiyam ka rath mila ab
संयम का रथ मिला अब
( राग : मुझे इश्क है तुम्ही से )
गलियों में चऊगति के , युग युग से जीव भटके ,
संयम का रथ मिला अब , चलना है राज पथ पे . .
कहीं भूख रोटी की है , कही भूख है दौलत की ,
नजरे किसी की भूखी , कही भूख है शोहरत की ,
ये भूख भोग की है , मिटेगी त्याग पथ पे ,
संयम का रथ मिला अब . . . 1
बलवान शस्त्रधारी भी जीता यहाँ ( डर ) डर के ,
कितना बड़ा हो कोई , मंडराती मौत सर पे ,
जहाँ मौत ना डराये , दर्गति भी नही पटके ,
संयम का रथ मिला अब . . . 2
पल - पल में पाप होते , ये कषाय दुःख ही बोते ,
श्रापित है जीव जैसे , कर्मो का बोझ ढोके ,
ये श्राप है मिटाना , चलना है महाव्रत पे ,
संयम का रथ मिला अब . . . 3
संग्राम अब छिड़ेगा , आठों कर्म शत्रु से ,
समता समिति समकित , ऐसे दिव्य अस्त्रों से ,
पंचम गति मिलेगी , प्रदीप इस विजयपथ पे ,
संयम का रथ मिला अब . . . 4
प्रदीपजी ढालावत
मुंबई
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