Saiyam arthi sura - संयमना अर्थी शूरा

Saiyam arthi sura

संयमना अर्थी शूरा 

( राग : किन्ना सोना यार मेरा ) 

संयमना अर्थी शूरा , सत्त्व केवू लावे , 
जोइ - जोइ मारूँ हैयुं , बोले आज भावे , 

हो संयम क्यारे मळशे , हो संयम क्यारे मळशे , 
हो संयम क्यारे मळशे , हो मुजने क्यारे मळशे . . . 

हुं भोगमां डूबी , पळपळ दुःख पामुं 
तृष्णामां सळगी , दिनरात गुमावुं , 
तुं भोग तजीने , हरपळ सुख पामे , 
संतोषना सुखमां , दिनरात वितावे , 
भोजनथाळी रमवा शेरी , तारी मारी एक , 
हुं भटकुं , तुं मुजने छोडी , 
संयम पाम्यो छेक . . . हो संयम क्यारे . . . 1 

आ मोंघु जीवन , पळमां वही जाशे , 
जो नहीं सुधरूं तो , क्यां आतम जाशे , 
गुरु मळीया एवा , जे हाथ पकडशे , 
दई साथ मने जे , मोक्षे लइ जाशे , 
संयमनो अभिलाष हवे तो , 
रोम - रोममां थाय , हृदयवीणाना तार वगाडी , 
योगनो कांक्षी गाय . . . हो संयम क्यारे . . . 2 

जैनम संघवी 
थाणा

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