Karemi Bhante Jain Diksha Stavan Hindi Lyrics

Karemi Bhante Jain Diksha Stavan Hindi Lyrics 

शासन ने ह्रदय मा धारे 
अरिहंत नी आणा स्वीकारे 

स्वरुप प्राप्ति ना लक्षे 
सहु संयम भिक्षा मांगे 
अंतर नी यात्रा करवा
निर्ग्रन्थ नो पंथ स्वीकारे
रत्नत्रयी मेलव वा
महाभिनिष्क्रमण ने साधे
आतम ने जे आतम नो बोध करावे
स्वयं ने जे स्वयं नी शोध करावे
खोवायु तत्त्व तेनी खोज करावे
चिदानंदमा शास्वत मौज करावे
आतम ने जे आतम नो बोध करावे
स्वयं ने जे स्वयं नी शोध करावे
खोवायु तत्त्व तेनी खोज करावे
चिदानंदमा शास्वत मौज करावे

करेमी भंते करेमी भंते करेमी भंते भंते 
आतम झंखे यावत जीवन करेमी भंते भंते
संयम पंथे संयम पंथे संयम पंथे भंते
आतम झंखे वीचरवा ने संयम पंथे भंते

अविकारी अकल अविनाशी
अजरामर असंग साक्षी
अशरीरी अखंड अरूपी
हूं चेतन ज्ञान स्वरूपी
प्रभु पंथनी जे निष्ठा ने प्रगटावे
परम तनी जे प्रार्थना अवधारे
वैराग केरा रंग मा रंगाये
रोमे रोम थी बस एक नाद जागे
प्रभु पंथनी जे निष्ठा ने प्रगटावे
परम तनी जे प्रार्थना अवधारे
वैराग केरा रंग मा रंगाये
रोमे रोम थी बस एक नाद जागे

करेमी भंते करेमी भंते करेमी भंते भंते 
करेमी भंते करेमी भंते करेमी भंते भंते 
आतम झंखे यावत जीवन करेमी भंते भंते
संयम पंथे संयम पंथे संयम पंथे भंते
आतम झंखे वीचरवा ने संयम पंथे भंते
करेमी भंते करेमी भंते करेमी भंते भंते
करेमी भंते करेमी भंते करेमी भंते भंते
करेमी भंते करेमी भंते करेमी भंते भंते...

टिप्पणियाँ