Jag Na Nath Banya Te Pahela
वीर प्रभु का निर्वाण – यशोदाजी का विलाप
जग ना नाथ बन्या ते पहेला
मारा स्वामी नाथ थया
मुझ ने एकलवाई छोडी
तमे मोक्ष मा केम गया…
म्हारी मेहंदी मारुं सिंदूर
नाथ तमारा नामे छे
मारू घर ने मारी दुनिया
एकज तव सरनामे छे
दासी छुं हु जन्म जन्म नी
जीवु केम तमारी दया…
हस्त मिलाप करी जीवनमा
सथवारा नुं वचन दीधु
दीक्षा पण एकल लीधी ने
केवल पण एकल लीधु
मुक्ति पूरी ना सिंहासन पर
एकल काय ना शोभी रह्या…
मंगल सुत्र तमे मुझ कंठे
बाँध्यु छे निज हाथ धरी
नाम तमारु रहीश जपती
हुँ तो अंतिम श्वास थकी
सुना सुना जीवन मंदिर
द्वार परम ना बंद थया
म्हारा स्वामी नाथ थया…
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