Dhany Dhany Aapko Vandna Aapko Lyrics - घन्य - धन्य आपको वंदना आपको

Dhany Dhany Aapko Vandna Aapko Lyrics 

घन्य - धन्य आपको , वंदना आपको 

( राग : ये दुनिया ये महफिल ) 

पंचम काल में , साधु बने ये शान से , 
हिंसा को तजते है , निखरते है तप जप ज्ञान से , 
ये पाँच समिति धारते , ये तीन गुप्ति पालते , 
रखते है स्वाद पे संयम , गुरु चरणे जीवन वारते . . . 

ओ मुनिवर , ओ गुरुवर , 
धन्य धन्य आपको , वंदन आपको . . . . 
हँसकर प्रसन्नता से , परिषह सहन करें , 
प्यासे रहे या भूखे , पालन नियम करे , 
सर्दी हो चाहे गर्मी , आंधी तूफान हो , 
विचलित भ्रमित ना होते , आगे कदम भरे . . . धन्य - धन्य . . . 1 

परिवार घर को छोड़ , पैदल विचरण करें , 
गादी रेशम की तजके , भूमि पे शयन करें , 
श्रृंगार त्याग केशो का लोच खुद करें , 
धन धान त्याग घर - घर गोचरी ग्रहण करें . . . धन्य - धन्य . . . 2 

कषाय , अवगुणों को , आतम से शुद्ध करे , 
मैत्री , क्षमा , दया से खुद को समृद्ध करे , 
वंदे नाकोड़ा दरबार , प्रदीप आपको , 
तन का मोह छोड़ , कर्मों से युद्ध करें . . . धन्य - धन्य . . . 3 

प्रदीपजी ढालावत
मुंबई

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